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14 Jan 2020

दिलीप कुमार की ऑनस्क्रीन मां, जिसने इंडस्ट्री में बदल दी महिलाओं की पहचान


बॉलीवुड इंडस्ट्री में दुर्गा खोटे ने एक लंबा सफर तय किया है और एक बड़ा मुकाम भी हासिल किया है. उन्होंने करीब पांच दशकों तक फिल्मों में विभिन्न भूमिकाएं निभाईं. वे इंडस्ट्री में उस समय आयी थीं जब महिलाओं का फिल्मों में काम करना समाज में सभ्य नहीं माना जाता था. उस समय महिलाएं फिल्मों में काम करने से बचती थीं. ऐसे समय में इंडस्ट्री में दुर्गा खोटे आईं.

कहा जाता है कि दुर्गा खोटे इंडस्ट्री में जिस दौर में आईं थीं उस दौर में सभ्य घर की लड़कियां फिल्मों में काम नहीं किया करती थीं. उस जमाने में ये एक बड़ी बात थी. दुर्गा ने लीड एक्ट्रेस से लेकर मां तक के रोल प्ले किए. कभी वे दयालू मां के रूप में नजर आईं तो कभी वे नेगेटिव शेड में दिखीं. दुर्गा ने दिलीप कुमार की फिल्म मुगले आजम में उनकी मां का रोल प्ले किया था.

दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को मुंबई में हुआ था. अपने समय में वे इंडस्ट्री की सबसे एजुकेटेड एक्ट्रेस में भी गीनी जाती थीं. दुर्गा खोटे की पर्सनल लाइफ अच्छी नहीं रही. शुरुआत में उन्हें इस वजह से काफी स्ट्रगल करना पड़ा. 24 साल की उम्र में वे विधवा हो गईं. उस समय वे दो बच्चों की मां थीं. उन्होंने इस कठिन समय का सामना खुद किया और बुरे हालातों में वे डटी रहीं.

दुर्गा के करियर की तरफ रुख करें तो उन्होंने 1931 में आई साइलेंट एरा की फिल्म फरेबी जलाल में काम किया. इसके अलावा वे विधुर, अमर ज्योति और वीर कुणाल जैसी फिल्मों में नजर आईं. माना जाता है कि वे 30-40 के दशक में महिला वर्ग के लिए एक प्रेरणा बन कर उभरी थीं. उन्होंने ही ये ट्रेंड सेट किया जिसके बाद से फिल्मों में धीरे-धीरे एक्ट्रेस को कास्ट किया जाने लगा.

उन्हें देख कर ही महिलाओं के मन में फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनने के खयाल आने शुरू हो गए थे. लोग दुर्गा की परफॉर्मेंस से प्रेरणा लेते थे. अगर दुर्गा खोटे को इंडियन सिनेमा के शुरुआती दौर की सबसे पावरफुल लेडी कहा जाए तो इसमें कुछ ग़लत नहीं होगा. दुर्गा खोटे ने 50 साल के अपने लंबे करियर में 200 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया. हिंदी फिल्मों के अलावा वे मराठी फिल्मों से भी जुड़ी रहीं. इन सबके बीच थियेटर के लिए उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय योगदान को भी नहीं भुलाया जा सकता.

इन फिल्मों में भी आईं नजर

इसके अलावा उन्होंने मुसाफिर, राज तिलक, मिर्ज़ा ग़ालिब, मुगल - ए - आजम, लव इन शिमला, अनुपमा, दादी मां, आनंद, बावर्ची, बॉबी, नमक हराम और कर्ज जैसी फिल्मों में काम किया. फिल्म इंडस्ट्री में दिए गए उनके शानदार योगदान के लिए दादा साहब फाल्के अवार्ड से साल में समानित किया गया. इसके अलावा भारत सरकार की ओर से उन्हें पद्मश्री भी मिला. 22 सितंबर, 1991 को उनका निधन हो गया.

Source - Jagran 

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