Operating Department Smart Search


Sort :
Loading...
Go to Page :

9 Aug 2026

मैं भी! | नकलची चूजे की कहानी | बच्चों की नैतिक बाल कहानी

मैं भी!

एक छोटे-से गाँव के किनारे एक शांत तालाब था। तालाब के पास घास से भरा एक सुंदर मैदान था। वहीं एक दिन दो छोटे-छोटे बच्चे दुनिया में आए—एक था बतख का बच्चा, और दूसरा था मुर्गी का चूजा

दोनों देखने में बहुत प्यारे थे, लेकिन उनकी आदतें बिल्कुल अलग थीं।

बतख का बच्चा बहुत उत्सुक था। वह हर चीज़ को खुद आजमाकर देखना चाहता था। चूजा भी उसके साथ-साथ घूमता रहता था।

एक सुबह बतख के बच्चे ने कहा,

“आज मैं मैदान में घूमने जा रहा हूँ।”

चूजा तुरंत बोला,

“मैं भी!”

बतख का बच्चा आगे बढ़ गया और चूजा भी उसके पीछे चल पड़ा।

थोड़ी दूर जाकर बतख के बच्चे ने जमीन में एक छोटा-सा गड्ढा देखा।

उसने पंजों से मिट्टी हटाते हुए कहा,

“देखो, मैं यहाँ कुछ खोजूँगा।”

चूजा बोला,

“मैं भी!”

दोनों मिट्टी कुरेदने लगे। थोड़ी देर बाद उन्हें मिट्टी के अंदर एक छोटा-सा कीड़ा दिखाई दिया। चूजा उसे देखकर खुश हो गया।

आगे बढ़ने पर उन्हें एक रंग-बिरंगी तितली दिखाई दी।

बतख का बच्चा बोला,

“मैं तितली के पीछे दौड़ूँगा!”

चूजा फिर बोला,

“मैं भी!”

दोनों तितली के पीछे दौड़ने लगे। तितली कभी इधर जाती, कभी उधर। कुछ देर बाद दोनों थककर घास पर बैठ गए।

दोपहर होते-होते वे तालाब के किनारे पहुँच गए।

बतख का बच्चा पानी को देखकर बहुत खुश हुआ।

उसने कहा,

“अब मैं पानी में तैरूँगा।”

चूजा हमेशा की तरह तुरंत बोला,

“मैं भी तैरूँगा!”

बतख के बच्चे ने उसकी ओर देखा और बोला,

“लेकिन तुमने कभी तैरना सीखा है?”

चूजे ने कहा,

“जब तुम तैर सकते हो, तो मैं भी तैर सकता हूँ!”

यह सुनकर बतख का बच्चा थोड़ा चिंतित हुआ।

उसने कहा,

“हर काम की अपनी तैयारी होती है। तुम पहले पानी को समझ लो।”

लेकिन चूजा नहीं माना।

वह बोला,

“मैं भी!”

और देखते ही देखते वह तालाब में कूद गया।

पानी में जाते ही उसके पंख फड़फड़ाने लगे। उसके छोटे-छोटे पैर इधर-उधर चलने लगे, लेकिन वह पानी के ऊपर टिक नहीं पा रहा था।

चूजा घबरा गया।

“बचाओ! बचाओ!”

बतख का बच्चा तुरंत उसकी ओर तैरा और उसे किनारे तक ले आया।

चूजा काँप रहा था।

कुछ देर बाद उसने धीरे से कहा,

“मुझे लगा था कि तुम जो कर सकते हो, मैं भी कर सकता हूँ।”

बतख के बच्चे ने प्यार से कहा,

“तुम बहुत कुछ कर सकते हो। लेकिन जरूरी नहीं कि जो काम मैं कर सकता हूँ, वही काम तुम भी उसी तरह कर सको। हर किसी की अपनी अलग क्षमता होती है।”

चूजे ने सिर झुका लिया।

उस दिन उसे एक बहुत जरूरी बात समझ में आ गई।

किसी की हर बात की नकल करना समझदारी नहीं है।

किसी को देखकर हमें अच्छी बातें जरूर सीखनी चाहिए, लेकिन किसी काम को करने से पहले यह भी देखना चाहिए कि वह काम हमारे लिए सुरक्षित है या नहीं और हमें उसे करने की सही जानकारी या अभ्यास है या नहीं।

उस दिन के बाद चूजा जब भी कोई नया काम देखता, तुरंत “मैं भी!” नहीं कहता।

वह पहले सोचता—

“क्या मैं यह काम कर सकता हूँ? क्या मुझे इसे करने का तरीका पता है?”

और यही सोच उसे पहले से कहीं ज्यादा समझदार बना गई।

कहानी की सीख

दूसरों की अच्छी आदतों से सीखना अच्छी बात है, लेकिन बिना सोचे-समझे किसी की नकल करना ठीक नहीं। हर व्यक्ति की अपनी क्षमता होती है। किसी भी नए काम को करने से पहले उसकी जानकारी, अपनी क्षमता और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

Followers